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वो मोहब्बत…

क्या कहे कि उसकी नज़रों में हमने क्या देखा बस सब कुछ देखा मोहब्बत के सिवा देखा मोहब्बत अधूरी रहे तो मोहब्बत तो रहती है वरना फिर कभी उसका कहाँ कोई भी निशाँ देखा किताबों में दबे गुलाब की तरह दिल में छुपी रहे उसी मोहब्बत से ज़िन्दगी को अक्सर महका हुआ देखा जो मोहब्बत… Continue reading वो मोहब्बत…