Parenting · Poems

मेरी परवरिश

नहीं चाहती कभी काँटा कोई तेरे पैरों में चुभे नहीं नहीं है दुआ मेरी सफर में कभी ठोकर तुझे लगे नहीं ये भी दुआ नहीं मांगती कोई आंसू तेरी आँखों से बहे नहीं नहीं चाहती सूरज की तपती धूप धूल भरी आंधियां तुझे मिले नहीं नहीं चाहती हूँ ज़िन्दगी में कभी दुःख, निराशा , हार… Continue reading मेरी परवरिश

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बाकी  है

A poem for my soulmate…. तुम्हारे  साथ  कितना  वक़्त  गुज़ार  चुके  हैं  पर लगता  है  अभी  कई  उम्र  बिताना  बाकी  है   ज़िन्दगी  के  कितने  उतार  चढाव  देखे  हैं  तुम  संग पर  अभी  कई  छोटे  छोटे  पल  गुज़ारना   बाकी  है   अभी  तो  समंदर  के  पानी  में  छप  छप   करना  है तुम  संग  हमे  रेत … Continue reading बाकी  है

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नया साल नया वक़्त

कोई सुबह नयी नहीं होती कोई साल नया नहीं होता हम जब तक खुद न बदले ज़िन्दगी में कुछ नहीं बदलता कोई रात हमे सुला नहीं सकती कोई अँधेरा हमें डरा नहीं सकता पर हम जबतक खुद की आँखें न खोले कोई वक़्त हमे जगा नहीं सकता तारीखे बदल सकती है सालों के अंक बदल… Continue reading नया साल नया वक़्त

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दुआ

वो एहसास भी मुरझा गए , तेरे दिए फूलों की तरह ….. हम भी मोहब्बत के मारे हो गए औरों की तरह ……. तू आया था अपनी मर्ज़ी से मर्ज़ी से चला गया मेरे दर पर न लौटा तू मौसमों की तरह ……. क्या छुपाऊं मैं पलकों के पर्दों से अब छलक ही जाता है दर्द… Continue reading दुआ

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कभी कभी तो मिलते हो…

कभी चाँद से दिखते हो कभी किसी कमल से खिलते हो कभी किसी लम्हे से गुज़रते हो तुम कभी कभी तो मिलते हो ……. कभी हौले से बादलों से निकलते हो कभी रिम झिम फुहार से बरसते हो कभी गुनगुनी धूप से लगते हो तुम कभी कभी तो मिलते हो …. कभी सुबह से निखरते… Continue reading कभी कभी तो मिलते हो…