Poems

बाकी  है

A poem for my soulmate…. तुम्हारे  साथ  कितना  वक़्त  गुज़ार  चुके  हैं  पर लगता  है  अभी  कई  उम्र  बिताना  बाकी  है   ज़िन्दगी  के  कितने  उतार  चढाव  देखे  हैं  तुम  संग पर  अभी  कई  छोटे  छोटे  पल  गुज़ारना   बाकी  है   अभी  तो  समंदर  के  पानी  में  छप  छप   करना  है तुम  संग  हमे  रेत … Continue reading बाकी  है

Poems

नया साल नया वक़्त

कोई सुबह नयी नहीं होती कोई साल नया नहीं होता हम जब तक खुद न बदले ज़िन्दगी में कुछ नहीं बदलता कोई रात हमे सुला नहीं सकती कोई अँधेरा हमें डरा नहीं सकता पर हम जबतक खुद की आँखें न खोले कोई वक़्त हमे जगा नहीं सकता तारीखे बदल सकती है सालों के अंक बदल… Continue reading नया साल नया वक़्त